यह नये वर्ष की..
ऊषा गाती मंगल प्रभात
यह दशों दिशाएँ सद्य:स्नात
यह खग कलरव का अरुण गान
नूतन अवनी, अभिनव विहान
महकता धरा आँचल मह मह । यह नये वर्ष की

फूलों के चेहरे चटकीले
बच्चों के पेहरे रंगीले
नव तरुणों की ऊँची उडान
और वृध्दों की कुछ कम थकान
नूतन समाज का नव वैभव । यह नये वर्ष की..
धुल जाये भय का तम काला
घर घर में फैले उजियाला
य़ह उजियाला करना अक्षय
होगा हमको बनकर निर्भय
भारत फिर कहलाये सह्रदय । यह नये वर्ष की..
कोई न रहे उदास चिंतित
हम हर लें उसके दु:ख त्वरित
सबके चेहेरे स्मित आलोकित
यह वैभव हो अपना स्व-रचित
अनुभव कर लें आत्मिक गौरव । यह नये वर्ष की..
यह मंगल गान रहे गुंजित
यह धरा सदैव रहे सुरभित
जन-जन का मानस हो प्रमुदित
कुसुमित बगिया, आंगन मुकुलित
पुलकित मन प्राण करें अनुभव । यह नये वर्ष की..
आज का विचार
त्याग मे सुख अवश्य है पर त्याग का अर्थ
कायरता नही होना चाहिये ।
स्वास्थ्य सुझाव
कान में रिंगिंग ठीक करने के लिये
तुलसी के ६ पत्ते पहले दिन खाइये
और रोज़ एक एक बढाते हुए २१ पतों तक
खाकर बंद कीजीये ।