
विपुल ओर रचना हाल ही में एक नन्ही सी बेटी से लाभान्वित हुए हैं ।
उनकी इस प्यारी सी बिटिया के लिये ये लोरी
मेरी नन्ही सी परी
बाबा माँ की दुलारी
प्यारी प्यारी सुकुमारी
सोजा चुप होजा ।
तेरे लिये आँखों के दिये जलाये हैं
तेरे लिये हाथों के पलने झुलाये हैं
कितना कितना करें जतन
फिर भी ना रुके रुदन
ना रो रे फुलवारी
प्यारी प्यारी सुकुमारी
सोजा चुप हो जा ।
हवा ने तेरे लिये गीत गुनगुनाये हैं
चांद तारों ने नये सपने साथ लाये है
रात रानी ने कैसी खुशबु बिखेरी है
दादी ने भी फूलों से नजर उतारी है
जाऊँ तो पे वारी वारी
प्यारी प्यारी सुकुमारी
सोजा चुप होजा ।