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सोमवार, 6 सितंबर 2010
फिर वही शाम है और वही रात है,.
फिर वही शाम है और वही रात है,
और फिर चांदनी में वही बात है ।
फिर से वो ही कशिश है फिजाओं में भी
और फिर से तुम्हारा हँसी साथ है । फिर..
फिर वही रातरानी है महकी हुई
खुशबुएँ और मस्ती, बिखरती हुई
कहीं लहरों पे संगीत बजता हुआ
चांद का एक जादू सा सजता हुआ
आँखों आँखों में ही हो रही बात है
प्यार की ये अनोखी ही सौगात है । फिर ..
फिर मिलें हैं मगर अब वो सपने कहाँ
वो दिन जो बिताये थे, अपने कहाँ
रास्ता और साथी वो खो सा गया
और कोई और अपना खुदा हो गया
न मन में खुशी का वो अहसास है
घुटन है, चुभन है, और हालात हैं ।
फिर वही शाम है और वही रात है
पर इस चांदनी में न वो बात है
न कोई कशिश है फिजाओं में भी
साथ अपने बस धुंधले से जज्बात है । फिर ..
गुरुवार, 16 अक्टूबर 2008
शरद की दूधिया चांदनी

शरद की दूधिया चांदनी
और उसमें नहाये से तुम
नीम की फुनगी पे चांद
और मेरे कितने पास तुम
दिल में जज्बातों की हलचल
बिलकुल अनजान उससे तुम
मेरी आँखों का सुख चैन
और सुकून भी दिल का तुम
कहूँ आज कैसे ये तुम से
कि दिल का अरमान भी तुम
तुम ही समझ लेना इसको
अब ये दिल जाने या तुम
आज का विचार
चाँद की असलीयत जान कर भी वह उतना ही खूबसूरत लगता है
जितना पहले लगता था ।
स्वास्थ्य सुझाव
शरद पूर्णिमा को चांद की रोशनी में दूध या खीर ठंडी कर के पीना
स्वास्थ्य वर्धक है । दूध को औटा कर या खीर बना कर बाहर छत पर
या बालकनी में चांद निकलने के बाद रख दें ताकि चांद की किरणें
पतीली के अंदर पडें, ३-४ घंटे कमसे कम उसे रख कर चांदनी में
ही ठंडा करें फिर आधी रात को पीयें । इसके साथ गाने की महफिल
भी जमाई जा सकती है । हमारे घर में यह किया जाता था तो मैं
भी करती हूँ । और वाकई दूध का स्वाद बढ जाता है ।
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