बुधवार, 12 नवंबर 2014

जल्दी आना -2






कल चले जाओगे सीमा पर
अपने कर्तव्य पूर्ति हित
अभिमान है तुम पर।

पर क्या करूं इन आखों का
इतना रोकने पर भी
आती हैं भर भर।

कितनी आयेगी तुम्हारी याद
तुम्हारे जाने के बाद
कैसे बताऊँ।

खबरों पर ही टिकी रहेंगी
जरा ना डिगेंगी
मेरी ये नजरें।


हर फोन, हर चिठ्ठी
हर मेल को तरसेंगी,
पनियाली आँखे।

दुष्मन को हल्के ना लेना
लोहे के चने चबवाना
रक्षा करना देश की।

विजयी हो कर आना
यहां की चिंता न करना
वापिस जल्दी आना।

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