रविवार, 27 अक्तूबर 2013

पीछे मुडकर






अब अच्छा लगता है
देखना जिंदगी को
पीछे मुडकर।

जब पहुंच गया है
मंजिल के पास
अपना ये सफर।

क्या पाया हमने
क्या खोया
सोचे क्यूं कर।

अच्छे से ही
कट गये सब
शामो सहर।

सुख में हंस दिये
दुख में रो लिये
इन्सां बन कर।

कुछ दिया किसी को
कुछ लिया
हिसाब बराबर।

चित्र गूगल से साभार।

22 टिप्‍पणियां:

Sushil Kumar Joshi ने कहा…

पीछे दिखाई देता है
अच्छा लगे या बुरा
आगे दिखता ही नहीं
सुर मिलेगा या फिर
होने वाला है बेसुरा :)

बहुत सुंदर !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

कहीं धूप तो कहीं छाँह...सुन्दर कविता।

रविकर ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति-
आभार आदरणीया -

Anupama Tripathi ने कहा…

सहज सुंदर अभिव्यक्ति .....!!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

मुड़कर देखते हुए लगता है - काश कुछ कदम पीछे ले पाते और दरके हुए हालातों को दूसरे ढंग से देख पाते ….
सुकून कहाँ रहता है किसी पड़ाव पर - एक अधूरापन साथ साथ चलता ही जाता है

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : भारतीय संस्कृति और लक्ष्मी पूजन

Rajesh Kumari ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार २९ /१० /१३ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका वहाँ हार्दिक स्वागत है ।

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना,,,बधाई

RECENT POST -: तुलसी बिन सून लगे अंगना

आशा जोगळेकर ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
दिगम्बर नासवा ने कहा…

जीवन में हिसाब किताब कहां बराबर होता है ... जब तक सांस रहती है मंजिल की तलाश रहती है ...

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

भावपूर्ण कविता

शिवनाथ कुमार ने कहा…

गुजर चुका सफ़र जिंदगी का अक्सर अच्छा लगता है जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं
सादर !

Kailash Sharma ने कहा…

सुख में हंस दिये
दुख में रो लिये
इन्सां बन कर।

...वाह! यही तो जीवन का सत्य है..बहुत सुन्दर

Abhishek Ojha ने कहा…

भूल-चुक लेनी-देनी !

Suman ने कहा…

अच्छे से ही
कट गये सब
शामो सहर।
बस यही तृप्ति काफी है ताई,
कल अच्छा था तो जरुर आज भी अच्छा ही होगा, कल से ही तो आज का जन्म होता है बहुत सार्थक रचना, पढने में जरा विलंब हुआ थोड़ी व्यस्त थी, आभार !

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत ही उम्दा और विचारणीय.

रामराम.

ज्योति सिंह ने कहा…

ye jeevan hai is jeevan ka yahi hai rang roop .sundar bahut

ज्योति सिंह ने कहा…

ye jeevan hai is jeevan ka yahi hai rang roop .sundar bahut

बेनामी ने कहा…

Bahot khoob.

Bharti Rajguru ने कहा…

kya yar aapbhi is umarme likhane lage sari pyarki kavita to mai dang rah gai kya budhpemebhi pyarki kashis hoti hai

Bharti Rajguru ने कहा…

kya yar aapbhi is umarme likhane lage sari pyarki kavita to mai dang rah gai kya budhpemebhi pyarki kashis hoti hai

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना,,,बधाई