शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

मन गई दिवाली








गम की अमावस में न डाल हथियार तू
एक दीप तो हौले से जरा उजियार तू।

रोशनी की हर किरण चीरती है अंधेरा
देख रख हौसला, न मान हार तू।

मन में अगर हो आस तो पूरी करेंगे हम
यह ठान के ह्रदय में, बढ आगे यार तू।

जितनी है सोच काली उसे मांज के हटा
फिर देख अपने मन को यूँ चमकदार तू।

अपनी खुशी के फूल चमन में बिखेर दे
तो बहेगी खुशबू वाली, लेना बयार तू।

तेरे मन की रोशनी से हो उजास आस पास
तब मन गई दिवाली यही जान यार तू।






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