सोमवार, 4 मार्च 2013

भरतपुर पक्षी अभयारण्य




भरतपुर पक्षी अभयारण्य

दिल्ली में रहते रहते कोई 32 वर्ष हो गये हैं, इस दौरान कितनी बार मन में खयाल आया था कि एक बार भरतपुर जरूर जाना है । पर हो ही नही पाया । इस बार तो मैनें तय ही कर लिया था कि इस सर्दी में जाना ही है भरतपुर । तो हमने फरवरी को इस पर अमल कर ही लिया । हमारे साथ एडम भी था । सुहास का ये अमेरिकन विद्यार्थी हमारे यहां वह जब ११ वी १२ वी में पढता था तब पहली बार आया था । अब तो अमेरीकन एम्बेसी में काम करता है । अभी साउथ अफ्रीका में नियुक्त है और यहां दिल्ली काम से आया है । हमने पूछा, चलोगे भरतपुर, तो खुशी खुशी हामी भर दी । हॉटेल का बुकिंग भी कर दिया ।  तय किया था कि टैक्सी से ही जायेंगे ताकि हमारा वाहन हमारे साथ ही हो, और जरूरत पडी तो और कहीं जाने के लिये भी इस्तेमाल कर सकते हैं । भरतपुर दिल्ली  कोई 185 कि.मी. का रास्ता है ।
भरतपुर पक्षी अभयारण्य को महाराज केवलादेव ने बनवाया था । यहां पर हर वर्ष हजारों की संख्या में  प्रवासी पक्षी आते हैं और हमारे जैसे पर्यवेक्षक भी । इनमें से कुछ भारत के ही अन्य प्रदेशों से आते है तो कुछ विदेशों से । इसे १९८२ में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा ( नेशनल पार्क ) मिला  और १९८५ में यह विश्व की धरोहरों (नेशनल हेरिटेज) में शामिल किया गया । 

हम सुबह साढे सात बजे चल पडे । मन में गीत गूंज रहा था पंछी बनू, उडती फिरूं, मस्त गगन में............... दो ढाई घंटे के सफर के बाद भूख लग आई तो रास्ते  रुके महारानी पेलेस नामक रेस्तराँ में । आलू पराठे का नाश्ता किया बढिया गरम गरम चाय पी और चल पडे आगे । कोई साढेबारह बजे हम भरतपुर के हमारे हॉटेल पहुंच गये
नाम है, सूर्या विलास पैलेस । सुंदर नया हॉटेल जो कि एकदम पुराने राजमहल के स्टाइल में बना हुआ । मैनेजर ने सुझाव दिया कि हम लंच करें और फिर जायें अभयारण्य । पर हमारे तो पेट के पराठे अभी हिले भी नही थे, तो हमने पहले अपने गंतव्य पर जाना ही उचित समझा । टिकिट लेकर कैमेरा से लैस हो हम पक्षी अभयारण्य में प्रवेश कर गये ।
एक गाइड कर लिया और दो साइकिल रिक्षा भी ले ली क्यूं कि पता चला कि ये अभयारण्य कोई २९ वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है । इसमें करीब १० वर्ग किलोमीटर पानी के सरोवर और दलदली इलाका है जहां पानी के पक्षी आते हैं ।  ऱिक्षा जब चल पडे तब पहले पहल कोई २-३ किलोमीटर तक कुछ दिखा ही नही ।


आगे जा कर दिखे रोज रिंग्ड पेराकीट यानि वे तोते जिनके नर गले में एक लाल रंग का छल्ला सा होता है । पर ये तो हमने नीमराना में भी देखे थे । एक छोटा धब्बेदार उल्लू ( स्पॉटेड आउलेट )
भी दिखा (फोटो) ।


एक जगह दिखा धब्बेदार बाज़ (स्पॉटेड ईगल)।


थोडा आगे जाने पर दिखा कि एक पेड गिरा हुआ था सूख भी गया था उसके कोटर में से गर्दन निकालता  हुआ मॉनिटर लिझार्ड  दिखा । (फोटो)



अब थोडा मज़ा आने लगा था । हमारा गाइड भी काफी जानकार था । हम आगे गये तो पानी का लम्बा सा तालाब लगा वहां बहुत सी काली बत्तखें तैर रही थीं । उनका नाम है कॉमन कूट । काफी शोर मचा रहीं थीं ।  ये दूसरे पक्षियों के साथ सर्दियों में तो सामंजस्य बठा लेती हैं पर प्रजनन के समय अपने रहने के स्थान के लिये काफी आक्रामक हो जाती हैं । ये यहां के ही पक्षी हैं । (फोटो)


आगे जा कर सफेद झक बगुले दिखे । इनकी गर्दन थो़डी लंबी होती है । गाइड ने बताया कि इनको इग्रेटस् कहते हैं ये बडे छोटे और मझौले आकार के होते हैं । बडे ईग्रेटस सुंदर और ग्रेसफुल होते हैं। इनको हेरॉन भी कहते हैं और होते भी हेरॉन कुल के हैं ।
 हेऱॉन की तरह ही ये उडान के समय अपनी गर्दन अंदर की और खींच कर उडते हैं । इनकी उडान भी देखनेवाली होती है और इनको दूसरे ईग्रेटस् से अलग करती है इनके सफेद रंग की वजह से ही इन्हे इग्रेटस् कहते हैं । (फोटो )

सफेद ईग्रेटस् के अलावा दूसरे हेरॉन्स भी दिखे जैसे कि ग्रे हैरॉन, पर्पल हैरॉन, पॉन्ड हेरॉन वगैरा ।


ग्रे हेरॉन पानी के आस पास रहने वाला पक्षी है यह दिखने में व्हाइट हेरॉन या लार्ज ईग्रेट जैसाही लगता है पर इसके बाहरी पर और पंख स्लेटी रंग के होते हैं । नीचे के पर बिस्किट के रंग के होते हैं यह बडा पक्षी है और करीब १०० से.मी. लंबा होता है । इसका सिर सफेद होता है पर उस पर एक काली पट्टी सी होती है । इनकी चोंच गुलाबी रंगत लिये पीले रंग की होती है ।

ग्रे हैरॉन

पर्पल हेरॉन को इसका नाम इसके पंखों की वजह से मिला है । नीले जामनी पंखों वाले इस पक्षी की चोंच लंबी और पीली होती है ।यह भी पानी का पक्षी है और मछलियां इसका आहार है । यह अफ्रीका योरोप और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है ।

फिर दिखे पॉन्ड हेरॉन या  पैडी बर्ड । यह एक छोटे आकार का हेरॉन है और दक्षिणि ईरान, भारत, श्रीलंका, बांगला देश में पाया जाता है । यह सुंदर सफेद और भूरे रग के परों वाला होता है और इसके पीठ पर एक गहरे भूरे रंग की पट्टी होती है । चोंच पीली होती है । (फोटो)
     
नीलकंठ और किंगफिशर भी देखे ।  नीलकंठ को इंडियन रोलर भी कहते हैं । ये भारत में खूब पाये जाते हैं । इनके दर्शन शुभ माने जाते हैं । ये प्रवासी तो नही माने जाते पर
मौसमी बदलाव के साथ स्थलांतर करते पाये जाते हैं ।  इनके पर और सिर नीला होता है पर छाती भूरी होती है इनका कंठ नीला नही होता वरन भूरा ही होता है । (फोटो)

किंगफिशर बहुत सुंदर रंगबिरंगे परों वाला पक्षी है । चिडिया से थोडे बडे छोटी पूंछ वाले
किंग फिशर का सिर उसके देह के हिसाब से बडा होता है । इसकी चोंच लंबी और मजबूत होती है ताकि मछली आसानी से पकड सके । इसके पंख और पीठ नीले तथा पेट नारंगी रंग का होता है । ये पानी के अंदर का अपना शिकार बखूबी देख लेता है ।
(फोटो)

और थोडे आगे जाकर दिखे पर्पल हेन मूर या जामनी जल मुर्गी । यह मझोले आकार के पक्षी खूबसूरत भूरे,नीले, बैंगनी रग के पर वाले होते हैं ।  नर का रंग ज्यादा चमकीला तथा मादा का थोडा हलका होता है । ये कम पानी वाले क्षेत्र में घूमते पाये जाते हैं । ये स्वभावतः शरमीले होने से हम इन्हे दूर से ही देख पाये ।

  एक जगह खूब दूर से सुर्खाब भी दिखीं इन्हें गोल्डन गीज़ कहा जाता है । इनके पंख
सुनहरे रंग के होते हैं । 'सुर्खाब के पर 'वाली कहावत याद आ गई । हमारे गाइड के पास एक अच्छी सी दूरबीन भी थी जिससे पक्षी दूर भी हो तो अच्छा व्यू मिल जाता था । सिर्फ फोटो नही खिंच पाते थे ।

आगे जा कर देखे पेन्टेड स्टॉर्कस् । बहुत ही खूबसूरत रंगो वाले और बडे आकार प्रकार के ये प्रवासी पक्षी भरतपुर में प्रजनन के लिये आते हैं और सेप्टेंबर से मार्च तक यहीं डेरा डाले रहते हैं । जब तक कि बच्चे बडे होकर उडने लायक नही हो जाते । हमने माता पिता को बच्चों को उडने का प्रशिक्षण देते हुए देखा । इनकी पूरी की पूरी बस्तियां है यहां । (फोटो) 

ये बडे आकार प्रकार वाले पक्षी लंबी चोंच वाले होते हैं जो कि अंत में जा कर एक हुक की तरह मुड होती है जो आयबिस पक्षियों में भी पाई जाती है ।
पूर्ण वयस्क में सिर नारंगी लाल  होता है और दोनो पंखों पर काला सफेद धब्बों वाला आकर्षक  डिजाइन होता है  ये यहां दक्षिण भारत से प्रजनन के लिये आते हैं ।
इन सब पक्षियों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देख कर बहुत आनंद आ रहा था ।  पर अब काफी थकान हो गई थी । जब कि हम तो रिक्षे पर थे । बेचारे रिक्षा चालक ! वापसी पर दोनो तरफ सांप की बांबियां बनी दिखीं और एक पर एक कोब्रा भी दिखा पर वह ठंड की वजह से काफी सुस्त था और धूप  सेंकने बांबी के ऊपर आकर लेटा था ।

 एडम ने एक फोटो क्लिक किया और हम वापस गेट पर आये और हमारी टैक्सी में बैठ कर वापिस अपने होटल । फ्रेश होकर चाय पी बिस्किट खाये और टीवी चला कर चैनल चेन्ज करते रहे । थोडी देर बाद नीचे जाकर खाना खाया । बहुत बढिया खाना था । पनीर पसंदा, नान, दाल चावल और आलू गोभी । थकान के कारण नींद जल्दी आ गई ।
हमें फिर से सुबह पंछी देखने जाना था ।

बहुतसे चित्र गूगल के सौजन्य से ।
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