बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

छू लें आसमान



हम भी तो चाहते हैं कि छू लें आसमान
हासिल करें जहां में अपना कोई मकाम .

इस जमीं सा खूबसूरत  बनायें अपना आप
इसमे कहीं नही है  कोई खराब बात

इन शोख हवाओं सा लहरायें और गायें
संतूर हो या पंछी मुस्काये गुनगुनायें

तालीम पाये खुद और औरों को भी दिलायें
अलग अलग से हासिल, करें इल्म नाम पायें

इस साफ सी बरफ सा सुथरा बनें समाज
सपनों को  अपने पूरा होना ही होगा आज

हव्वा खातून की जमीं पर हम कैद ना रहेंगे
बचायेंगे कश्मीरियत और आगे को ही बढेंगे .
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