शनिवार, 26 मई 2012

जाने कैसी बात हुई


जाने कैसी बात हुई
उनसे मुलाकात हुई
आँख खुली तो चांदनी भरी
पूनम वाली रात हुई ।

सोचा था न कभी जीवन में
ऐसा भी क्षण आयेगा,
नियमबध्द मेरे जीवन में
जैसे वारदात हुई .।

कांटे, किरचें, कंकड वाली
डगरों से था भरा जीवन
वो क्या मिले, पांव के नीचे
मखमल की सौगात हुई ।

दिन भर की थकान से जैसे
था ये तन मन चूर हुआ
तेज धूप में चलते चलते
बिन बादल बरसात हुई .।

वो क्या आये मन वीणा के
तार सुरों को छेड उठे,
मधुर मधुर सुर गूंजने लगे
महफिल वाली रात हुई ।

काश ये समय मेरे लिये
बस अब यूँ ही ठहर जाये,
मौत भी आज अगर आये
तो कामयाब ये हयात हुई ।

23 टिप्‍पणियां:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

वाह बहुत खूब ...



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सतीश सक्सेना ने कहा…

तेज धूप में चलते चलते
बिन बादल बरसात हुई .

क्या बात है ....
प्रभावशाली रचना !

Vaanbhatt ने कहा…

बहुत खूब...ऐसा ही होता है प्रेम...कोई नियम-कानून नहीं जानता...

Arvind Mishra ने कहा…

एक सुन्दर सा प्रणय गीत :)

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत ही प्यारा गीत..

kshama ने कहा…

Wah! Kaash,aisa kuchh sabhee kee zindagee me hota!

Reena Maurya ने कहा…

क्या कहने...
बहुत ही सुन्दर भावाभिव्यक्ति..

मुकेश पाण्डेय चन्दन ने कहा…

bahut hi khoob !
sundar abhivyakti

दिलीप ने कहा…

bahut khoob....

निर्मला कपिला ने कहा…

आप तो कविता भी बहुत अच्छी लिखती हैं। पहले शह्र शह्र विदेश मे घुमाया अब अब कल्पनाओं की सैर करवा रही हैं धन्यवाद।ले चलीं

sushma 'आहुति' ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत ख्यालो से रची रचना......

Anupama Tripathi ने कहा…

सुंदर मन के भाव ...
कोमल अभिव्यक्ति .....
शुभकामनायें.

ana ने कहा…

bahut khub...wah

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सोचा था न कभी जीवन में
ऐसा भी क्षण आयेगा,
नियमबध्द मेरे जीवन में
जैसे वारदात हुई ...

कभी कभी जीवन में अचानक बदलाव आ जाए तो कितना सुहाना लगता है ... नियम से परे लीक से हट के मिले कुछ पल ...

सदा ने कहा…

अनुपम भाव संयोजित किये उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति।

dheerendra ने कहा…

भावपूर्ण सुंदर उत्कृष्ट प्रस्तुति,,,,,
आशा जी,,,फालोवर बन गया हूँ आप भी बने तो मुझे खुशी होगी

RECENT POST ,,,,, काव्यान्जलि ,,,,, ऐ हवा महक ले आ,,,,,

Rajput ने कहा…

वाह बहुत खूब !
बहुत ही प्यारा गीत

RITU ने कहा…

वाह! बहुत सुन्दर!!

sm ने कहा…

बहुत खूब

रश्मि प्रभा... ने कहा…

दिन भर की थकान से जैसे
था ये तन मन चूर हुआ
तेज धूप में चलते चलते
बिन बादल बरसात हुई .। ... और राहत मिली .... बहुत बढ़िया

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

वाह!

Rakesh Kumar ने कहा…

बात बात में यह तो बहुत ही सुन्दर बात हो गयी.
सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति.

mehhekk ने कहा…

behad khubsurat romani andaz,waah.