शनिवार, 26 मई 2012

जाने कैसी बात हुई


जाने कैसी बात हुई
उनसे मुलाकात हुई
आँख खुली तो चांदनी भरी
पूनम वाली रात हुई ।

सोचा था न कभी जीवन में
ऐसा भी क्षण आयेगा,
नियमबध्द मेरे जीवन में
जैसे वारदात हुई .।

कांटे, किरचें, कंकड वाली
डगरों से था भरा जीवन
वो क्या मिले, पांव के नीचे
मखमल की सौगात हुई ।

दिन भर की थकान से जैसे
था ये तन मन चूर हुआ
तेज धूप में चलते चलते
बिन बादल बरसात हुई .।

वो क्या आये मन वीणा के
तार सुरों को छेड उठे,
मधुर मधुर सुर गूंजने लगे
महफिल वाली रात हुई ।

काश ये समय मेरे लिये
बस अब यूँ ही ठहर जाये,
मौत भी आज अगर आये
तो कामयाब ये हयात हुई ।

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