रविवार, 27 सितंबर 2009

शुभ दशहरा


माँ, नौ दिन तक आपने सेवा का अवसर हमें दिया, आज आपके गमन का दिन है । ह्रदय आपके जाने से द्रवित है । आपके आने और रहने की खुशी को भी हम मन में समेटे हुए हैं । आशा करते हैं कि आशिर्वाद रूप में हमें आप से असीम शक्ति प्राप्त हो और शत्रू का निर्दालन करने में हम सक्षम बनें ।

आज विसर्जन दिवस
जन-ह्रदय व्यथित द्रवित
माँ इतनी खुशी देकर
जाना ही क्यूं है उचित ?
नौ दिन कैसे बीते
देह मन आनंदित
ढोल नगाडे बाजे
आरती और शुभं-गीत ।

(विडिओ देखें)


जाने के दिन पर माँ,
देकर जाना आशीष
जन-शक्ति, सैन्यशक्ति
देशभक्ति हो जागृत ।
ऐसा हो गर्जन कि
शत्रू हो आतंकित
हम रहें तैयार सदा
देश रक्षण हितार्थ ।
आप सबको दशहरे के पावन पर्व की शुभ कामनाएँ ।।
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