रविवार, 31 मई 2009

एक शाम



कहीं दूर क्षितिज पर
समंदर में डूबता सूरज
शायद, छन्न की आवाज करता हुआ ।

रेत में पाँव फैलाये तुम
उडते हुए अलक ,चेहेरा
आभा से दमकता हुआ

सांझ के बिखरते रंग
फैलते आकाश पर
मै हिंडोले पर झूलता हुआ

सलेटी रंग में घुलते से सारे रंग
आकाश में इक पतंग
अकेली सी

अंधेरे की दूब पर
तारों के खिलते फूल
चाँद खिसियाया हुआ

चलो चलते हैं वाली
भंगिमा में, उठतीं तुम
मेरा दिल बुझता हुआ ।

आज का विचार
अगर आप खिडकी खुली रखेंगे तो लोग तो झाकेंगे ही ।

स्वास्थ्य सुझाव
मूली के पत्ते केल्शियम और विटामिन सी का अच्छा स्त्रोत तो हैं ही, साथ ही बिलीरूबीन को कम करने में भी कारगर हैं
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