शुक्रवार, 21 मार्च 2008

...गिरगिटिया रंग में रंगा मेरा ब्लॉग..

आप लोग सोच रहे होंगे क्या हो गया है आशा (जी) को होली के रंगो ने इन्हे जैसे
बौरा दिया है । एक तो होली के इतने दिन पहले से ही रंगों से खेल रहीं हैं, अब तो हमें बख्शतीं पर नहीं इनके रंग हमारा पीछा नही छोड रहे । और अब ये गिरगिटिया
रंग ¡ हे भगवान ¡ माझ्या देवा ¡ Oh my God ¡



न न न ब्लॉग छोडने से पहले मेरी पूरी बात तो सुन लीजीये । मै यह कहना चाहती हूँ कि अभी जो यह मेरा ब्लॉग आप सिर्फ हिंदी के लाल रंग में देख सकते हैं सिर्फ एक चटख से आप इसे इंद्र-धनुषी रंगों में पढ सकते हैं । यानि कि अब मेरा लिखा
मेरे बंगला भाषी, गुजराती भाषी, तामिल भाषी, ओरिया भाषी और जाने कितने कितने
भाषी दोस्त अपनी अपनी लिपी में इसे आराम से पढ सकते हैं । है कि नही अच्छी
और मजेदार बात ।
करना आपको बस इतना सा है कि आपको भी तो एग्रीगेटर की मेल आई होगी तो आप भी उनके सरल आदेशों का पालन कर अपना ब्लॉग खूबसूरत और रंगीन बना सकते हैं ।
काश ये गिरगिट भाषांतर भी कर सकता ¡ बहर हाल होली मुबारक ¡
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