रविवार, 17 मई 2015

पचास सालों का साथ



पचास सालों का साथ
पचास सालों की दोस्ती
पचास सालों के विवाद
पचास सालों के संवाद





पचास सालों का रहना
पचास सालों का सहना
पचास सालों का संसार
के सागर में बहना

पचास सालों का हंसना
पचास सालों का रोना
पचास सालों का रूठना
पचास सालों का मनाना

पचास सालों के सुख
पचास सालों के दुःख
पचास सालों के वार
पचास सालों का प्यार

पचास सालों की हार
पचास सालों की जीत
पचास सालों से जो निभाई
वह रिवाज़ और रीत

पचास सालों की विफलता
पचास सालों का साफल्य
पचास सालों बाद अब
अब कुम्हलाता जाज्वल्य

यही है आस  
लें न जबतक अंतिम सांस
सालों का अपना ये साथ
चले यूं ही साथ ही साथ।


गत 12 मई को हमने अपने विवाह की पचास वी वर्षगांठ मनाई। उस वक्त मनमें उठे कुछ भाव थे ये।
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