शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

दर्द इतना बढा







दर्द इतना बढा सम्हाला न गया,
लाख चाहा मगर छुपाया न गया।



जाम आंखों के जो छलकने को हुए,
बहते अश्कों को फिर रुकाया न गया।

जख्म इतने दिये जमाने ने,
हम से मरहम भी लगाया न गया।

कोशिशें लाख कीं मगर फिर भी,
उनको आना न था, आया न गया।

ऊपरी तौर पे सब ठीक ही लगता लेकिन,
हाल अंदर का कुछ बताया न गया।

हम चल देंगे यकायक कि खाट तोडेंगे,
किसने जाना, किसी से जाना न गया।

जिंदगी का आज ये पल सच्चा है

इससे आगे को कुछ विचारा न गया।

चित्र गूगल से साभार

20 टिप्‍पणियां:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

वाह क्या बात! बहुत ख़ूब!

इसी मोड़ से गुज़रा है फिर कोई नौजवाँ और कुछ नहीं

रविकर ने कहा…

ऊपरी तौर पे सब ठीक ही लगता लेकिन,
हाल अंदर का कुछ बताया न गया

सुन्दर प्रस्तुति-
आभार आदरणीया-

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जीवन के कुछ गारे सत्य सहज ही लिख दिए ... लाजवाब शेर ...

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुंदर !

Archana Chaoji ने कहा…

"हम चल देंगे यकायक कि खाट तोडेंगे,
किसने जाना, किसी से जाना न गया।"...
वाह!

मेरा मन पंछी सा ने कहा…

लाजवाब रचना...
बहुत बेहतरीन.....
:-)

संजय भास्‍कर ने कहा…

हम चल देंगे यकायक कि खाट तोडेंगे, किसने जाना, किसी से जाना न गया।
जिंदगी का आज ये पल सच्चा है
....जीवन के कुछ सहज सत्य

Suman ने कहा…

जिंदगी का आज ये पल सच्चा है
इससे आगे को कुछ विचारा न गया।
बहुत खूब कहा है न भुत न भविष्य केवल वर्तमान यही सच है हर शेर लाजवाब है ताई,

Suman ने कहा…

ताई मै बहुत सम्मान करती हूँ आपका क्षमा मांगकर मुझे शर्मिंदा मत करिये ! अभी मै दस दिन घर से बाहर थी, वापिस आने पर सब कुछ कितना अस्तव्यस्त था ठीक करने में आठ दिन लग गए ! छह महीने तो बहुत समय होता है समझ सकती हू कोई बात नहीं आराम से पढ़ा कीजिये मुझे कभी किसीसे कोई शिकायत नहीं रहती है :) हाँ जिनको साहित्य की बेहतरीन पहचान है वे अगर हमारी रचना को पढ़े तो मन को अच्छा लगता है !

sushmaa kumarri ने कहा…

भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने...

प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' PBChaturvedi ने कहा…

बहुत उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
नयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

Ranjana verma ने कहा…

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल ....!!

Ranjana verma ने कहा…

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल ....!!

ओंकारनाथ मिश्र ने कहा…

बेहतरीन ढंग से कई भावों को उकेरती हुई रचना. अति सुन्दर.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत ही सटीक रचना.

रामराम

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आज अपना, कल पराया,
यथासंभव, यथासींमित।

Vaanbhatt ने कहा…

लाजवाब...

Unknown ने कहा…

बहुत ही सुंदर ... हरेक शेर में गहरे भाव मन को छू रहे हैं

Rakesh Kumar ने कहा…

हम चल देंगे यकायक कि खाट तोडेंगे, किसने जाना, किसी से जाना न गया।
जिंदगी का आज ये पल सच्चा है
इससे आगे को कुछ विचारा न गया।


यह भी खूब कही आपने आशा जी.

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.

Swapnil Shukla ने कहा…

वाह ! बहुत बढ़िया प्रस्तुति . आभार . नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं .

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