शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

जयोस्तुते जयोस्तुते


स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर प्रस्तुत है स्वातंत्र्यवीर सावरकर की स्वतंत्रता पर एक रचना जयोस्तुते । सावरकर जी से क्षमा मांगते हुए इसके अनुवाद का धारिष्ट्य कर रही हूँ । गीत के अधिकतर शब्द संस्कृत में हैं उन्हें वैसे ही रहने दिया है ।

जयोस्तुते
जयोSस्तुते जयोSस्तुते
श्री महन्मंगले शिवास्पदे शुभदे
स्वतंत्रते भगवती त्वामहम् यशोयुतां वंदे ।
जयोस्तुते

सुराष्ट्र की चैतन्य मूर्ती तुम, नीती संपदा की
स्वतंत्रते भगवती श्रीमती राज्ञी तुम उसकी
परवशता के नभ में तुम थी, आशा जगमग सी
स्वतंत्रते भगवती ध्रूव के समान स्थिर मूर्ती
वंदे त्वामहम् यशोयुतां वंदे, यशोयुतां वंदे ।।
जयोस्तुते

कपोल के हो रंग कुसुम्बी या कुसुम कपोलों की
स्वतंत्रते भगवती तुम्ही हो वह प्रकाश लाली,
तुम भास्कर का तेज, उदधि का गांभीर्य भी तुम ही
स्वतंत्रते भगवती, अन्यथा ग्रहण नष्टता की
वंदे त्वामहम् यशोयुतां वंदे, यशोयुतां वंदे ।।
जयोस्तुते

मोक्ष,मुक्ति ये रूप तुम्हारे, वेद सार सब ही
स्वतंत्रते भगवती, योगि का परब्रह्म तुम ही
जो जो उत्तम उदात्त उन्नत महन्मधुर वह भी
स्वतंत्रते भगवती तुम्हारे रूप रुचिर सब ही
वंदे त्वामहम् यशोयुतां वंदे, यशोयुतां वंदे।।
जयोस्तुते

हे अधम रक्तरंजिते, सुजन पूजिते, श्री स्वतंत्रते,
चरण में मरण तव, जनन
तुझ बिन जीवन भी मरण
ये सकल चराचर शरण तव चरण, शरण ।।
श्री स्वतंत्रतेSS,श्री स्वतंत्रतेSS,श्री स्वतंत्रतेSS,
जयोस्तुते

मूल गीत की एम पी 4 यहां दी है जो आप अवश्य सुनें । हमारे निश्चेष्ट मन प्राणों में यदि राष्ट्र प्रेम ऊर्जा इससे भरे तो ये प्रयास सार्थक हुआ । Jayostute Vdo clip: Courtesy www.youtube.com

आप सब ब्लॉगर भाई बहनों को रक्षाबंधन की बहुत बधाई ।

31 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

bahut achchha lag raha hai paddhkar.. nissandeh ham aabhari hain..

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

bahut achchha lag raha hai paddhkar.. nissandeh ham aabhari hain..

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
kshama ने कहा…

Translation bahut achha hua hai! Marathee geet kayee baar sun chukee hun!
Rakshabandhan tatha 15 August kee dheron shubhkamnayen!

P.N. Subramanian ने कहा…

हम तो आप के सौजन्य से पहली बार ही पढ़ और सुन पाए हैं. बहुत अच्छा लगा.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

रक्षाबंधन पर्व और स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अद्भुत स्तुति भारत माता की।

udaya veer singh ने कहा…

This is fine one, commendable work you have done ,thanks for your attachments with country , countrymen
and memoirs .

Vaanbhatt ने कहा…

वन्देमातरम...स्वतन्त्र दिवस पर यह गीत शेयर करने के लिए...धन्यवाद...

मीनाक्षी ने कहा…

आपको शायद पता चल जाता है कि मैं आपके ब्लॉग पर आई और आनन्द लेकर लौट गई बिना आहट के... :) सावरकर जी की रचना को सुनने मे यकीनन उर्जा का संचार होता महसूस होता है...रक्षाबन्धन पर आपको भी बधाई

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति.....

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

माँ भारती की प्यारी स्तुति..... अज पहली बार पढ़ी है.... बहुत बहुत आभार

Suman ने कहा…

वीर सावरकर की यह मराठी रचना
रेडिओ पर सुनती थी कभी, बहुत
बढ़िया लगा आपने फिर से सुनवा दिया
आभार आपका ! आपने इसका अनुवाद भी
अच्छा किया है बधाई !

Kunwar Kusumesh ने कहा…

स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.

Dorothy ने कहा…

सुंदर प्रेरक प्रस्तुति. आभार. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...
सादर,
डोरोथी.

Rachana ने कहा…

anuvad kar ke aapne bahut achchha kiya itni sunder kavita padhne ko mili
saader
rachana

संजय भास्कर ने कहा…

वाह बेहतरीन !!!!
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं….!

जय हिंद जय भारत
****************

Dr Varsha Singh ने कहा…

स्वतन्त्र दिवस पर यह गीत....सुंदर प्रेरक प्रस्तुति.

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

amrendra "amar" ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति, स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

सुराष्ट्र की चैतन्य मूर्ती तुम, नीती संपदा की

कहां है सावरकर जी का यह सपना???

बेनामी ने कहा…

आशाजी आपका लिरीक मैने लिख लिया .
"जयोस्तुते नमस्तुते" जैसे लिरिक मेरे आँफ़िस टेबल के कांच के निचे रखवाये है..बहोत लोग ऐसे लिरिक (लिखे हुए) मांगते है..!

Arti ने कहा…

मन में एक प्रसन्नता आ गयी यह लेख पढ़ कर .. बहुत सुन्दर अनुवाद किया है आपने , बहुत बहुत धन्यवाद आशाजी :)

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सावरकर जी की इस रचना को पहली बार पढ़ा और समझा है ... सभी आपके माध्यम से ... आपका बहुत बहुत आभार ..

ZEAL ने कहा…

पहली बार इस रचना को पढ़ा और सुना। इसके अनुवाद और sharing के लिए आभार। आपको रक्षाबंधन , स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी की शुभकामनायें।

Arvind Mishra ने कहा…

स्वातंत्र्यवीर सावरकर की यह रचना ऊर्जित करती है -आभार!

Vaishali ने कहा…

Loved reading it.

Bhushan ने कहा…

पंजाबी भाषी हूँ. वीर सावरकर का यह गीत अस्सी के दशक में मैंने अपने हैदराबाद प्रवास के दौरान सीखा था और तेलुगु भाषियों के साथ मिल कर कई कार्यक्रमों में गाया था. यह गीत पाषाणों में प्राण फूँक देता है. पुनः इसे सुन कर बहुत अच्छा लगा.

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

जन्‍माष्‍टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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लो जी, मैं तो डॉक्‍टर बन गया..
क्‍या साहित्‍यकार आउट ऑफ डेट हो गये हैं ?

Rakesh Kumar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.

संजय भास्कर ने कहा…

सुंदर प्रेरक प्रस्तुति. स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें...

mehhekk ने कहा…

lahanpani shalet sakali khup lagayache,kharach surekh anuvad.