
दुख क्या है—अभाव अनुभूती
चाह अगरचे ना हो पूरी
छिन जाये कोई वस्तू प्यारी
कोई प्रिय विछोह हो जाये
पीडा असहनीय हो जाये
हो शरीर की या ह्रदय की । दुख क्या है..
बींमारी—अभाव स्वास्थ्य का
वियोग क्या- अभाव प्रिय जन का
असफलता- यश का अभाव है
अपूर्णता चोट का भाव है
न्यून्यता है कमी पूर्ण की । दुख क्या है..
इस दुख को हम सुख में बदलें
कमी को अधिकता दें चलें
बीमारों को स्वास्थ्य मिले और
असफलता को यश में बदलें
कर लें अपनी ही क्षति पूर्ती । दुख क्या है..
विरही को उसका प्रिय मिल जाये
माँ को नन्हा शिशु मिल जाये
घावों पर लगायें मरहम
पौधों को पानी मिल जाये
करें प्रार्थना उस ईश्वर की । दुख क्या है..