गुरुवार, 22 जनवरी 2009

हम और वो


इधर हम जिंदगी के कायल हैं
उधर वो जान के भी दुष्मन है ।
इधर हम प्रेम गीत गाते है
वो उधर सर पे बांधे कफन हैं ।
हाथ जो हम बढायें दोस्ती का
वो तो थामें दुष्मनी का दामन हैं ।
भोले नादान मासूमों को वो
बनाते जाते दुश्मने अमन है ।
हम हैं जम्हूरियत की संतानें
तानाशाही के बनें वो इबन हैं ।
छीनना चाहते हैं आजादी
लहराते मातमी का परचम हैं ।
इससे हासिल किसी को क्या होगा
हम जलेंगे तो वो भी तो दफन हैं ।

आज का विचार
यदि शांति सम्मान पूर्वक नही रखी जा सकती तो वह शांती ही नही है ।

स्वास्थ्य सुझाव
फाइबर युक्त पदार्थों का सेवन करें यह कोलेस्ट्रोल को कम करते हैं ।
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