शुक्रवार, 5 मई 2017

कितने जतन किये

कितने जतन किये
तुमसे मिलने के

भिजवायें अनगिनत संदेसे
चिठिया पत्तर भेज के देखे
हवा पखेरू के संग अपने,
दुखडे कथन किये
कितने जतन किये।

सखा तुम्हारे, सखियाँ मेरी
दुखसे मोर जो थीं दुखियारी
जा जा कर के पास तिहारे
कष्ट निवेदन किये
कितने जतन किये।

तुम न पसीजे,तुम ना आये
क्यूं इतने कठोर हो पाये
क्या ऐसी मोसे भूल हो गई
जो ये मरन जिये
कितने जतन किये।

अब आजाओ न और रुलाओ
एक बार दरस दे जाओ
फिर चाहे वापिस ना आओ
कोई रहे या कि मिये
कितने जतन किये






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