बुधवार, 19 अप्रैल 2017

बादलों के उस पार

बादलों के उस पार कोई तो जहाँ होगा,
जहाँ हमारा भी इंतजार हो रहा होगा।

खूबसूरत अलग से झरने होंगे,
रंगों का कोई अनोखा सा समाँ होगा।

हमारे संगी साथी जो यहाँ बिछुड गये, होंगे
धुंआधार बारिशों से धुला आसमाँ होगा।

रुपये पैसे की जरूरत ही नही होगी,
खाना पीना भी तो मुफ्त ही वहाँ होगा

या फिर भूख प्यास ही नही होगी,
तृप्ति का अहसास ही सदा होगा।

हमारी सोच भी तो इस जहाँ की है,
ना जाने कौनसा नया मंजर वहाँ होगा।

जो भी होगा बहुत खूबसूरत होगा
ये यकीन हमारा भी सही होगा।


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