गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

भारत भाग्यविधाता


अब फिर से खुलने वाले हैं किस्मत के द्वार,
हे देव, क्या होगा इस देश का,
जनता की जीत होगी या कि हार।
सुबुध्दी देना भारत के भाग्य विधाताओं को
ताकि लिखें अपनी किस्मत वो सही सही।
पहचान लें कि कौन है गलत और कौन नही।
किस पर लगायें निशान, कमल, पंजा या झाडू
कुछ ऐसा करो कि सही बैठे जोड
अच्छे लोग चुन कर आयें और हार जायें जुगाडू।
बहुत हुआ चोरों का राज, अब तो आ जाये सुराज।
सुन रहे हो ना दाता, ऐसी दो बुध्दी कि सुखी रहें सब भारत भाग्यविधाता।


10 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

आमीन ।
पर उल्लुओं की भीड़ मेंकबूतरों के पर पहले ही नोंच दिये जाते हैं उड़ने से पहले ही बैठा दिये जाते है मुश्किल तो है पर नामुमकिन भी नहीं :)

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुंदर.
नई पोस्ट : सृष्टि का नियंता : स्त्री या पुरुष

Suman ने कहा…

अब तो उसी पर सबकी आशाएं टिकी हुयी है :)
आपकी प्रार्थना रंग लाये यही आशा है !

Vaanbhatt ने कहा…

आपकी दुआ कुबूल होती लग रही है...

Vinay Prajapati ने कहा…

बहुत उम्दा लेख!
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जानिए - ब्लॉग साइडबार की 5 प्रमुख ग़लतियाँ

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

आशाएं बनी रहें ....

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

गुरुवार, 17 अप्रैल 2014
भारत भाग्यविधाता

अब फिर से खुलने वाले हैं किस्मत के द्वार,
हे देव, क्या होगा इस देश का,
जनता की जीत होगी या कि हार।
सुबुध्दी देना भारत के भाग्य विधाताओं को
ताकि लिखें अपनी किस्मत वो सही सही।
पहचान लें कि कौन है गलत और कौन नही।
किस पर लगायें निशान, कमल, पंजा या झाडू
कुछ ऐसा करो कि सही बैठे जोड
अच्छे लोग चुन कर आयें और हार जायें जुगाडू।
बहुत हुआ चोरों का राज, अब तो आ जाये सुराज।
सुन रहे हो ना दाता, ऐसी दो बुध्दी कि सुखी रहें सब भारत भाग्यविधाता।


प्रस्तुतकर्ता आशा जोगळेकरपर 1:53 pm6 टिप्‍पणियां:इस संदेश के लिए लिंक
लेबल: भारत भाग्यविधाता

तथास्तु !आपकी भविष्यवाणी और शुभ भाव फलित हो। बेहद सशक्त सद्भाव प्रेरित अपील मतदाता के नाम।
गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

गुरुवार, 17 अप्रैल 2014
भारत भाग्यविधाता

अब फिर से खुलने वाले हैं किस्मत के द्वार,
हे देव, क्या होगा इस देश का,
जनता की जीत होगी या कि हार।
सुबुध्दी देना भारत के भाग्य विधाताओं को
ताकि लिखें अपनी किस्मत वो सही सही।
पहचान लें कि कौन है गलत और कौन नही।
किस पर लगायें निशान, कमल, पंजा या झाडू
कुछ ऐसा करो कि सही बैठे जोड
अच्छे लोग चुन कर आयें और हार जायें जुगाडू।
बहुत हुआ चोरों का राज, अब तो आ जाये सुराज।
सुन रहे हो ना दाता, ऐसी दो बुध्दी कि सुखी रहें सब भारत भाग्यविधाता।


प्रस्तुतकर्ता आशा जोगळेकरपर 1:53 pm6 टिप्‍पणियां:इस संदेश के लिए लिंक
लेबल: भारत भाग्यविधाता

तथास्तु !आपकी भविष्यवाणी और शुभ भाव फलित हो। बेहद सशक्त सद्भाव प्रेरित अपील मतदाता के नाम।
गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

न जाने कब
बनेगे अपने भाग्य के
हम खुद भाग्यविधाता
राजनीति में तो
एक दुसरे की
छीछालेदारी ही
करना है आता ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

ईश्वर भारत को भी भाग्य दे।