गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

भारत भाग्यविधाता


अब फिर से खुलने वाले हैं किस्मत के द्वार,
हे देव, क्या होगा इस देश का,
जनता की जीत होगी या कि हार।
सुबुध्दी देना भारत के भाग्य विधाताओं को
ताकि लिखें अपनी किस्मत वो सही सही।
पहचान लें कि कौन है गलत और कौन नही।
किस पर लगायें निशान, कमल, पंजा या झाडू
कुछ ऐसा करो कि सही बैठे जोड
अच्छे लोग चुन कर आयें और हार जायें जुगाडू।
बहुत हुआ चोरों का राज, अब तो आ जाये सुराज।
सुन रहे हो ना दाता, ऐसी दो बुध्दी कि सुखी रहें सब भारत भाग्यविधाता।


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