मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009

जय हो



भारत को चार चार ऑस्कर ! इतने सालों के सूखे के बाद जैसे जोर की बारिश आगई हो ।
ए आर रहमान साहब, रसूल पुकुट्टी साहब, गुलजार साहब और मस्कुराती पिन्कि वाह वाह !
भारतीय भी इस काबिल हैं कि ऑस्कर पा सकें आखिर अंगूर मीठे हो ही गये । ऱहमान साहब और
इन सबने हर भारतीय का सर फक्र से ऊँचा कर दिया । जय हो
इसी बात पर पेश है यह गीत । क्या बोल हैं । खास कर पहला अंतरा ।मुलाहिजा फरमाइये

आजा आजा जिन्दे शामियाने के तले
जरी वाले नीले आसमाने के तले
जय हो जय हो



रत्ती रत्ती सच्ची मैने जान गँवाई है
नचनच कोयलों पे रात बिताई है ।
अखियों की नींद मैने फूँक से उडा दी
गिन गिन तारे मैने उँगली जलाई है
आजा आजा.....
चख ले हाँ चख ले
रात शहद है चख ले
रख ले हाँ रख ले
दिल आखरी हद है रख ले।

काला काला काजल तेरा
कोई काला जादू है ना जय हो ।

कब से हाँ कब से
जो लब पे रुकी है कब से
कह दे हाँ कह दे
अब आँख झुकी है ..कह दे
थम के हाँ थम के
शब तेज कदम है ... थम के
दम ले हाँ दम ले
कुछ वक्त भी कम है.... दम ले

ऐसी ऐसी रोशन आँखें
रोशन दो दो हीरे हैं क्या
आजा आजा..... जय हो
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